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Sunday, March 13, 2011

निश्चय ही यह एक नसीहत है, अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले The right way

और मेरे बंदों से कह दीजिए कि वे बहुत ही अच्छी बात मुँह से निकाला करें क्योंकि शैतान आपस में फ़साद करवाता है, बेशक शैतान इंसान का खुला दुश्मन है।
क़ुरआन, 17, 53

निश्चय ही हमने अत्यंत व्यवस्थित ढंग से तुम पर कुरआन अवतरित किया है ; अतः अपने रब के हुक्म और फैसले के लिए धैर्य से काम लो और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न का आज्ञापालन न करना ।और प्रातः काल और संध्या काल अपने रब के नाम का स्मरण करो । और रात के कुछ हिस्से में भी उसे सजदा करो , लंबी लंबी रात तक उसकी तसबीह करते रहो। निःसंदेह ये लोग जल्दी मिलने वाली (सांसारिक) चीज़ से प्रेम रखते हैं और एक भारी दिन को अपने परे छोड़ रहे हैं । हमने उन्हें पैदा किया है और उनके जोड़-बन्द मजबूत किए और हम जब चाहें उन जैसों को पूरी तरह बदल दें।
निश्चय ही यह एक नसीहत है, अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले।
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे । निःसंदेह अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है। वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनके लिए उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है ।
क़ुरआन, 76, 23-31

Saturday, March 12, 2011

माँ-बाप के साथ औलाद के बर्ताव के बारे में अल्लाह की नीति और आदेश Charity begins from home

अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य प्रभु न बनाओ अन्यथा निंदित और असहाय होकर बैठे रह जाओगे। तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बंदगी न करो और माँ बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें झिड़को, बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो। और उनके आगे दयालुता से नम्रता की भुजाएँ बिछाए रखो और कहो : "मेरे रब ! जिस प्रकार उन्होंने बचपन में मुझे पाला है, तू भी उन पर दया कर।"
जो कुछ तुम्हारे जी में है उसे तुम्हारा रब भली-भाँति जानता है। यदि तुम सुयोग्य और अच्छे हुए तो निश्चय ही वह भी ऐसे रूजू करने वालों के लिए बड़ा क्षमाशील है।
- क़ुरआन, 17, 22-25

Friday, March 11, 2011

अल्लाह का नज़रिया बंदों की ख़र्चनीति के विषय में How to get prosperity ?

और रिश्तेदार को उसका हक़ दो और मिस्कीन को और मुसाफ़िर को और फ़िज़ूलख़र्ची न करो। बेशक फ़िज़ूलख़र्ची करने वाले शैतान के भाई हैं ; और शैतान अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है। और अगर तुम्हें अपने रब के फ़ज़्ल के इंतज़ार में जिसकी तुम्हें उम्मीद है , उनसे कतराना भी पड़े तो तुम उनसे नर्मी की बात कहो। और अपना हाथ न तो अपनी गरदन से बाँधे रखो और न उसे बिल्कुल खुला छोड़ दो कि निन्दित और असहाय होकर बैठ जाओ। तेरा रब जिसे चाहता है ज़्यादा और फैली हुई रोज़ी देता है और और जिसे चाहता है नपी तुली देता है। निःसंदेह वह अपने बंदो की ख़बर और उन पर नज़र रखता है।
- क़ुरआन, 17, 27-30

Thursday, March 10, 2011

अल्लाह की बादशाही और उसकी नीति औलाद के विषय में Lord of the worlds

आसमानों और ज़मीन की बादशाही अल्लाह के लिए है , वह जो चाहता है पैदा करता है । वह जिस को चाहता है बेटियाँ अता करता है और जिसको चाहता है बेटे अता करता है या उनको जमा कर देता है बेटे भी और बेटियाँ भी और जिसको चाहता है बेऔलाद रखता है । बेशक वह जानने वाला है ,क़ुदरत वाला है ।
(क़ुरआन, 42, 49-50)

Wednesday, March 9, 2011

जिंदगी के सच्चे सुख के लिए आपको अपनी ख़्वाहिशों को सामूहिक रूप से संतुलित करना होगा

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने कहा है कि  

1. दौलतमंदों और पूंजीपतियों की ख़ैरात और चंदे पर चलने वाली अंजुमनें हमेशा दौलतमंदों की ताक़त और मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था को क़ायम रखने में मददगार साबित होती हैं । वे गरीबों को सब्र और धैर्य का उपदेश करके उनके इन्क़लाबी जज़्बात को ठंडा करती रहती हैं ताकि पूंजीपति बेख़ौफ़ उनका ख़ून चूसते रहें ।
2. शोहरत और नामवरी की ख़्वाहिश मामूली ज़हन रखने वालों की एक खुली हुई कमजोरी है और बड़े बुद्धिजीवियों की गुप्त कमज़ोरी है।

हमारे देश की राजनीतिक संस्थाएं भी पूंजीपतियों और बुद्धिजीवियों के बल पर चलती हैं , इसीलिए शोषण भ्रष्टाचार का बोलबाला आज आम है ।
जनता आज मौजूदा सरकार से नाराज़ है , पूर्व सरकार से भी वह पहले नाराज़ हो चुकी है और अब जो नई सरकार आएगी , उससे भी बहुत जल्द यह जनता नाराज़ हो जाएगी क्योंकि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बने लेकिन राज चलता है पूँजीपतियों का ही। पत्र-पत्रिकाओं में लिखने वाले बुद्धिजीवियों का ख़र्चा-पानी भी इनसे ही चलता है। पूंजीपति जब इन पार्टियों को चंदा देते हैं तो फिर वे उसे कई गुना करके जनता से वसूलते हैं। खाने-पीने और बरतने की तमाम ज़रूरी चीज़ें महंगी हो जाती हैं। ज़मीन के जंगल से लेकर पानी तक पर, हर चीज़ पर ये पूंजीपति क़ानून बनवाकर क़ाबिज़ हो जाते हैं। ज़मीन के जंगल से लेकर आसमान के मंगल तक , हर जगह पर ये क़ब्ज़े की फ़िराक़ में लगे हुए हैं लेकिन 'ज़्यादा पाने' इनकी ख्वाहिश और ज्यादा बढ़ती चली जा रही है । ख्वाहिश की प्रकृति यही है ।
असल समस्या यह है कि जनता के पास इस समस्या का कोई समाधान नहीं है कि राजनीतिक संस्थाआओं को पूँजीपतियों के प्रभाव से कैसे आज़ाद कराया जाए ?
नेताओं और बुद्धिजीवियों के दिलों से लालच और ऐशो आराम की ख़्वाहिश कैसे निकाली जाए ?
उन्हें थोड़े में संतुष्ट रहना कैसे सिखाया जाए ?
हमें मारने वाली चीज़ यही 'ज़्यादा की ख़्वाहिश' है , आज से नहीं बल्कि सदा से। भारतीय ऋषियों ने भी इसे चिन्हित किया है और जब उनके 'ज्ञान' को भुला दिया गया तो फिर कुरआन ने भी तबाही का कारण यही बताया है :
'ज़्यादती की चाहत ने तुम्हें ग़ाफ़िल कर दिया । यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तान जा पहुँचे।' -103, 1-2
ज़्यादती की इसी चाहत में आज इंसान ने अपने ज़मीर , अपनी ग़ैरत और अपनी हया का गला ख़ुद अपने हाथों से घोंट डाला है , ख़ास व आम हरेक तबक़े ने । ऐसे में दूसरों के साथ साथ अपना भी जायज़ा लेना ज़रूरी है ।
इसी लेख को कुछ अंतर के साथ आप देख सकते हैं यहाँ :

ज़्यादा पाने की चाहत में ज़मीर की मौत

 http://allindiabloggersassociation.blogspot.com/2011/03/blog-post_6270.html