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Wednesday, April 27, 2011

अल्लाह की मेहरबानी है कि उसने बता दिया है कि भ्रष्टाचार मत करो Corruption


1. और एक दूसरे के माल आपस में धोखाधड़ी से न खाओ और न ही उन्हें अपने हाकिमों तक इस मक़सद से पहुंचाओ कि जनता की सम्पत्ति में से कुछ भाग भ्रष्टाचार के ज़रिए खुद खा जाओ और (जबकि) तुम जानते हो -कुरआन, 2, 188
2. ऐ ईमान वालो, एक दूसरे की सम्पत्ति अनाधिकृत रूप से मत खाओ मगर यह कि आपसी सहमति से व्यापार हो; आपस में रक्तपात (भी) न करो; निःसंदेह अल्लाह तुम पर कृपालु है। -कुरआन, 2, 172
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भ्रष्टाचार एक बुराई है जिसके पीछे इंसान की अनुशासनहीनता और उसका लालच होता है। जो लोग ईश्वर अल्लाह पर विश्वास रखते हैं, उनसे अल्लाह कह रहा है कि माल हासिल करने के लिए भ्रष्टाचार मत करो। न तो सरकारी माल को धोखाधड़ी करके खा जाओ और न ही नाजायज़ से तरीक़े से जनता के माल अपने हाकिमों तक पहुंचाओ कि उसमें से एक हिस्सा खुद खा जाओ। इस तरह ईमान वालों के लिए भ्रष्टाचार के ज़रिए माल हासिल करने को हराम ठहराता है। जो लोग इस शिक्षा पर चलते हैं, उनके दिल को सुकून मिलता है, उन्हें समाज में ऐतबार की नज़र से देखा जाता है और उनके माल और उनकी औलाद में अल्लाह बरकत देता है। ग़लत तरीक़ों से माल कमाकर समाज के लोग खुद को और अपने बच्चों को जिस ऐशो-इशरत का आदी बना देते हैं, वह ऐशो-इशरत भ्रष्ट आदमी को उसके जीवन के असली मक़सद से दूर कर देता है। उसके भ्रष्टाचार की अपने आप में यह सज़ा बिल्कुल नग़द है। इसी के साथ वह अपने बच्चों को भी नेकी और सच्चाई से दूर करने का काम करता है जिसकी वजह से वे भी दुनिया की बहुत सी बुराईयों के शिकार होकर तन-मन से दुखी रहते हैं।
अल्लाह की मेहरबानी यह है कि उसने बता दिया है कि भ्रष्टाचार मत करो, इसमें तुम्हारा भला नहीं है। अल्लाह की मेहरबानी यह है कि उसने आपस में खून बहाने को वर्जित ठहराया है। अगर समाज इन उसूलों पर चले तो समाज में शांति और विकास होगा और सभी उन्नति करेंगे। सभी लोग समृद्ध होंगे। हरेक आदमी सुरक्षित होगा। यह परिणाम होगा उस अनुशासन की पाबंदी का, जिसकी शिक्षा अल्लाह देता है। अल्लाह पर ईमान का दावा तब तक क़ाबिले ऐतबार ही नहीं है जब तक कि आदमी अल्लाह के ठहराए हलाल को हलाल और उसके ठहराए हराम को हराम न मान ले और वह तब तक भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हो सकता जब तक कि वह इनके मुताबिक़ खुद को संवार न ले।  

Tuesday, April 26, 2011

अंत में भला किन लोगों का होता है ?

मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि अल्लाह से सहायता माँगो और धीरज रखो यह धरती अल्लाह ही की है अपने बंदों में से जिसे चाहे वह उसका मालिक बना दे और अंत में भला उन ही का होता है जो अल्लाह से डरते हैं । - क़ुरआन, 7, 128

Sunday, April 24, 2011

अल्लाह ऐसा नहीं है कि वह अपने लिए संतान बनाए


1. और यहूदी कहते हैं कि उज़ैर अल्लाह का बेटा है और ईसाई कहते हैं कि मसीह अल्लाह का बेटा है, यह उनकी अपने मुंह की बातें हैं, वे उन लोगों की बात की नक़ल कर रहे हैं जिन्होंने उन से पहले इन्कार किया, अल्लाह की मार उन पर, कैसे भटक रहे हैं ? -कुरआन, 9, 30

2. और आप कह दीजिए कि सब स्तुतियां उसी अल्लाह के लिए हैं जो कोई संतान नहीं रखता और न सत्ता में कोई उसका भागीदार है और न कमज़ोरी की की वजह से कोई उसका सहायक है और उसकी महानता का भरपूर बयान कीजिए। -कुरआन, 17, 111

3. परब्रह्म परमेश्वर अल्लाह को शोभित नहीं कि वह अपने लिए संतान बनाए, वह बड़ा महिमावान है वह जब किसी काम को करने का निर्णय करता है तो उसके लिए वह ‘हो जा‘ कहता है सो वह काम हो जाता है। -कुरआन, 19, 35 '

Thursday, April 21, 2011

अल्लाह के वचन को थोड़े से माल के बदले मत बेच डालो


1. ...और अल्लाह से जो प्रतिज्ञा करो उसे पूरा करो। -कुरआन, 6,153
2. और तुम अल्लाह के वचन को पूरा करो जब आपस में वचन कर लो और सौगंध को पक्का करने के बाद न तोड़ो और तुम अल्लाह को गवाह भी बना चुके हो, निःसंदेह अल्लाह जानता है जो कुछ तुम करते हो। -कुरआन, 16, 91
3. निःसंदेह अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतें उनके हक़दारों को पहुंचा दो और जब लोगों में फ़ैसला करने लगो तो इंसाफ़ से फ़ैसला करो।
 -कुरआन, 4, 58
4. और तुम लोग अल्लाह के वचन को थोड़े से माल के बदले मत बेच डालो (अर्थात लालच में पड़कर सत्य से विचलित न हुआ करो), निःसंदेह जो अल्लाह के यहां है वही तुम्हारे लिए बहुत अच्छा है यदि समझना चाहो। -कुरआन, 16, 95 

Wednesday, April 20, 2011

प्रतिज्ञा के विषय में अल्लाह की नीति


1. हे आस्तिको ! प्रतिज्ञाओं को पूरा करो।  
              -कुरआन, 5, 1
2. ...और अपनी प्रतिज्ञाओं का पालन करो, निःसंदेह प्रतिज्ञा के विषय में जवाब तलब किया जाएगा।  -कुरआन, 17, 34